Monday, 4 June 2012

पर्यावरण दिवस

आज पर्यावरण दिवस है, बहुत सी सरकारी संस्था आज इसके बारे मे विचार और मंथन करेगे , पर जमीनी हकीकत कुछ लग है, वो अपनी पेट पूजा करके एक नई योजना  का खाका तैयार कर देगे, और वो सिर्फ वो योजना कागजो मे ही चलती रहगी और ४-५ साल बाद में जनता को पता चलेगा की उस योजना मे इतने करोड़ का  घोटाला होवा है ! राजस्थान मे कई पहाड़ है जो  अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है , सरकार अन्धाधुन खान आवटन कर रही है, सरकार की एक  योजन चल रही है हरियालो  राजस्थान पर मुझे तो लग नहीं रहा है की कही पर भी हरियाली हो रही है, एक और योजना है  हरित राजस्थान, पर राजस्थान तो हरा नहीं हुआ पर कई लोगो की जेबे हरे हरे नोटों से हरी हो गई है!

यह वही धरा है जो  दुनिया के महानतम स्थानो मे गिनी जाती है , वह स्थान जहाँ 363 जांबाज लोगों ने खेजड़ी के वृक्षों को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए और उफ तक नहीं की. 'सर साटे भी रूंख रहे तो, भी सस्तो जाण' के शबद को व्यवहार में चरितार्थ करते हुए ये लोग एक एक कर अपने सिर कटने के लिए आगे करते रहे. ऐसी घटना दुनिया में कहीं नहीं घटी है. धरती को, स्रष्टि को बचाने का ऐसा प्रयास कहीं नहीं हुआ. दुर्भाग्य हमारा कि भारत में और वो भी राजस्थान में यह घटना घटी है, विडबना यह है की आज लोग जानते ही नहीं है. वर्ना यह एक  पर्यावरण प्रेमियों का एक अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ होता. 

खेजडली स्मारक 















यहाँ पर जाम्भोजी जैसे लोक देवता होवे उन्होंने अपने पुरे जीवन को पर्यावरण के नाम कर दिया और अपना एक अलग सम्प्रदाय बना लिया ! जाम्भोजी ने उन्तिश नियम बताये मुख्य रूप यह है हरा वृक्ष नहीं कटवाना।,  काम, क्रोध, मोह एवं लोभ का नाश करना। पशुओं की रक्षा करना।, आज पर्यावरण को साफ़ सुथरा रखना बहुत ही ज़रूरी हो गया है आज फिर कोई जाम्भोजी की आवश्कता है !

  जाम्भोजी  




2 comments:

ganesh sain said...

very nice

Rajput said...

बहुत अच्छी जानकारी

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