राजस्थानी विहर गीत :- राजस्थान के लोग पुराने ज़माने में व्यापार करने के लिए देश के दुसरे राज्यों मे जाते थे ! तब उनकी पत्नी विहर गीत गाती थी ! कभी कारुज़ा को बोलती की की मेरे पिया को संदेसा भिजवाती ! कुछ ऐसा यह गीत है जो अपने पिया को बोलती है की आप परदेश मत जावो ओजी ओ हदक मिजाजो ओ ढोला ओजी ओ हदक मिजाजी ओ ढोला मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं तपै रै तावड़ौ, लूवां लाय लगाय घूंघट री छांयां कुण करसी, कुण थांनै चँवर डुळाय ओजी मिरगानैणी रा ढोला, मतना सिधाओ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं डांफर बाजै, ठंड पड़ै असराळ सेज बिछा कुण अंग लगासी, पिलँग पथरणौ ढाळ ओजी पिया प्यारी रा ढोला, मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं बसै नखराळी, कांमणगारी नार कांमण करसी मन बिलमासी, झांझर रै झिंणकार ओजी चन्नावरणी रा ढोला, मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | चैत महीनै रुप निखरतां, क्यूं छोडौ घरबार च्यार टकां की थारी नोकरी, लाख टकां की नार ओजी नणदलबाई रा ओ वीरा, मतना सिधाऔ