Friday, 5 October 2012

अजन्मी लड़की का गुनाह

यह कविता उन अजन्मी लडकियों की है जिन्हें जन्म से पहले ही मोंत की सजा सुना दी गयी थी,और उन्हें अपने गुनाह का भी पता नहीं है !


मैं बेगुनाह हूँ तो फिर मुझको सज़ा क्यों न हो,                     
बेटी हु ना यही तो मेरा सबसे बड़ा गुनाह  है 

मे एक अँधेरी रात सी हु,जो सिर्फ अँधेरा ही देती है 
तुम्हे तो चाहिए कुलदीपक, जो तेरे घर को करे रोशन
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर.....

अक्स तो मे तेरा ही हु और खून भी तो तेरा ही हु माँ  
फिर भी तू अपने अस्तित्व को  मिटाना चाहती है
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर..........


यह फेसला तेरा नहीं है,क्यों की फेसले तो तुम ले ही नहीं सकती,
पर मुश्किल यह की छिपाकर भी नहीं रख सकती ज़माने से
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर.........

मे भी अंधेरों की गुफा से जीवन की रोशनी चाहती हु 
तेरी कोख से जन्म लेकर मे भी जानु जीवन क्या है
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर..........


बेटी तो हमेसा ही परेशानी की एक कड़ी रही है माँ
पर होती है अपनी  ही अस्तित्वहीन परछाई,
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर........

तुने माना है कि मैं कोई ग़ैर नहीं हूँ मेरी  माँ
मेरे सपनों को भी थोड़ी जगह दे दे जीवन मे तेरे
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर......



 तेरी ख़ामोशियाँ ज़माने को बहुत कुछ कहना चाहे हैं,
 फ़ुरसत कहा है ज़माने को जो तेरी ख़ामोशियों को सुन ले
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर........


कब तक मेरा यूही कोख मे कत्ल करवाती रहोगी  माँ
और कब तक मुझे बिना जन्मे ही मरना होगा मेरी माँ
मैं बेगुनाह हूँ तो फिर........


मैं बेगुनाह हूँ तो फिर मुझको सज़ा क्यों न हो,
बेटी हु ना यही तो मेरा सबसे बड़ा गुनाह  है 





Tuesday, 25 September 2012

नारी जीवन

नारी के जीवन को कविता के माध्म से बताने की छोटी सी कोशिश !


बाबुल तुम बगिया के माली, हम तरुवर के फुल रे 
खिलते ही हम पिया संग चले, जाएँ तो लोट न आयें,

आँखों से आँसू निकले तो पीछे बाबुल रोये,
घर की कन्या बगिया का फुल,फिर  ना डाली से जुड़े  
बाबुल तुम बगिया के माली.......

 सुध ना हमको  जनम के पहले , अपनी कहाँ थी क्यारी
 जब आँख खुली तो, हम थे और गोद थी  तुम्हारी 
बाबुल तुम बगिया के माली......

ऐसा था वह संसार हमारा जहाँ शाम भी लगे सवेरा 
बाबुल तुम थे विशाल वक्ष, हम कोमल केसर क्यारी रे 
बाबुल तुम बगिया के माली.......

दुःख में भी हमने सुख देखा तेरी आचल के छाव मे 
बाबुल तुम कुलवंश कमल हो , हम कोमल पंखुड़ियां रे 
बाबुल तुम बगिया के माली.......


बचपन बिता भोलेपन मे पर अब झलके  रंग जवानी के
बाबुल ढूढ़ते फिरो तुम हमको,हम ढूंढें अपना सावरिया रे
बाबुल तुम बगिया के माली.......

बदती उमर लोक-लाज  से जा टकराई
इज्जत गिरने के डर से, दुनिया  डोली ले आई
 बाबुल तुम बगिया के माली.....

गूंजी शहनाई तो  मन रोया और नयन बहे  बाबुल
ओढ़ चुनरी सुहाग की, हाथो मे डाली हथकड़ियां रे
बाबुल तुम बगिया के माली.....

तन का सौदा कर के भी तो , मिला ना मन का मीत रे
 रीत निभाई प्रीत की,  पर वो ही निकला हरजाई  रे
बाबुल तुम बगिया के माली.....

ब्याह नाम की  यह लीला  करवाई लाखों पर
मांग रखी मंडप पर मन ही मन बाबुल रोये रे
बाबुल तुम बगिया के माली.....

प्यार बताकर पीड  मिली तो नीर निकला अंखियाँ से
सखियाँ बिछुड़ी तो प्रीत मिली पिया की  रे
बाबुल तुम बगिया के माली....


जब  ससुराल पहुंच कर देखा तो दुनिया ही न्यारी थी
फूलों की सी थी हरी भरी क्यारी पर थी वो कांटो की फुलवारी
बाबुल तुम बगिया के माली

 दुल्हन बनकर दिया कुलदीपक, दासी बन घर चलाया
माँ बनकर ममता बांटी तो ,झोंपड़िया बनी महल  रे
बाबुल तुम बगिया के माली.....


जनम लिया तो जले पिता -माँ ,जब यौवन खिला ननद -भाभी
ब्याह रचा तो जला मोहल्ला , पुत्र हुआ तो बंध्या भी
बाबुल तुम बगिया के माली.....


जगत से छुड़ा कर अपने को , माथे बिंदु में बंद किया
कर्तव्यो में बाँधा तन को त्याग -तप से साधा मन को

बाबुल तुम बगिया के माली.....



गर पहले गए पिया जो हमसे तो जग जीने ना दे
अगर हम ही चल बसें , तो फिर जग बाटें रेवड़ियां रे
बाबुल तुम बगिया के माली.....




Wednesday, 25 July 2012

शहीद का आखरी ख़त

शहीद का आखरी ख़त 


आज कारगिल विजय दिवस है, उनकी याद मे आज पूरा देश उनको नमन करता है 
एक छोटी सी कविता के माध्म से इन ५२७ वीर रणबंकोरो को मेरा सलाम !

साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  ?
हाल अगर पूछे माता  तो सुनी कोख दिखा देना ?
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो .........
हाल अगर पूछे बहिना तो सुनी कलाई दिखा देना 
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  
हाल अगर पत्नी पूछे तो सुनी मांग दिखा देना 
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  

हाल अगर पूछे बेटा तो सुना आचल दिखा देना 
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  

हाल अगर पूछे सखा तो खाली खाली मन दिखा देना 
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  

हाल अगर पूछे गावंवाले तो खाली कफ़न दिखा देना 
साथी अगर तुम घर पहुच सको तो मेरा हाल बता देना  ?


वो तो चले गए पर जाते जाते अपना सब कुछ देश को समर्पित कर गए 
उनके लिए देश सेवा से बड़ा कोई फर्ज़ नहीं है घर परिवार बाद मे है पहले भारत माता है, मे सभी सहिदो को सलाम करता हु  जोँ देश की खातिर अपने सबसे बङेँ परिवार व भारत माता के लिए अपने प्राण हँसते हँसते न्यौँछावर कर देते है